जेएल न्यूज / JL NEWS
करनाल (हरियाणा) / 27-07-2026
(रिपोर्ट – राजेंद्र कुमार)
मन की उड़ान साहित्यिक संस्था (रजि.) करनाल हरियाणा द्वारा करनाल क्लब अभिनंदन सभागार में वरिष्ठ शायर एवं संस्था संरक्षक रहे डॉ एस के शर्मा को समर्पित एक शाम चिराग़-ए-सुखन डॉ एस के शर्मा के नाम से साहित्यिक कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ महावीर प्रसाद शास्त्री ने की, मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकारा अंजु शर्मा रही, विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. अशोक भाटिया व प्रेम पाल सागर रहे। विशेष अतिथि डॉ पहूप सिंह एवं पूर्व जिला बाल कल्याण समिति अध्यक्ष सुरेन्द्र सिंह मान व समाजसेवी परमिंदर पाल सिंह रहे।कार्यक्रम डॉ महावीर प्रसाद शास्त्री के आशीर्वचनों से शुरू हुआ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ महावीर प्रसाद शास्त्री ने जिसे शिद्दत से चाहा मैंने मुझसे दूर हो गई, लगा यूं जिन्दगी मेरी बड़ी बेनूर हो गई, मुख्य अतिथि अंजु शर्मा ने कहा बड़े शौक़ से सुन रहा था जमाना, तुम्ही सौ गए दास्तां कहते कहते, विशिष्ट अतिथि डॉ अशोक भाटिया ने कहा पानी उतना ही बचा, जितना मनुष्य की आंखों में बच रहा, वरिष्ठ कवि प्रेम पाल सागर ने कहा तेरा जीवन दिव्य उजियारा गंगा सी पावन धार बने, अग्नि से झुलसी धरती पर सावन की फुहार बने, विशेष अतिथि डॉ पहूप सिंह, सुरेन्द्र सिंह मान, परमिंदर सिंह पाल सिंह ने भी डॉ एस के शर्मा के जीवन पर प्रकाश डाला। वरिष्ठ शायर इक़बाल पानीपती ने कहा नकूश याद के वो खुश ख़िसाल छोड़ गया, हमारे चेहरे पे रंग ए मलाल छोड़ गया,कवि गुरमुख सिंह वड़ैच ने पढ़ा हाथ जो फैले हुए हैं, अपने हक़ के वास्ते,एक दिन बन जाएंगे सब, मुठ्ठियां तुम देखना, संस्था संस्थापक रामेश्वर देव ने कहा. सेवा करना काम था उनका,शहर में चर्चा आम था उनका,संस्था अध्यक्ष कवयित्री पूनम गोयल ने कहा महफिलों की शान था मेरा भाई,अदब की पहचान था मेरा भाई, कवि नरेश लाभ ने कहा खिलती जहां प्रेम की कलियां, वहीं कृष्ण बस्ते,सुखमय पल जीवन का होता, कष्ट सभी मिटते, कवि राजकुमार मायूस ने कहा जब कभी भी शायरी की महफिल सजाई जायेगी,आप की कमी हर किसी का दिल दुखा जायेगी, कवयित्री अंजु चौधरी अनु ने कहा दिल के आंगन में आज भी , कुछ अधूरी आहटें होती हैं, जैसे कोई नाम होंठों तक आकर हर बार चुप रह जाता है, कवि राधेश्याम भारतीय ने कहा बाहें पसारे खड़ा है सागर,लिये हार हाथों में खड़ा है सागर,इतनी खुशी क्या कम है मेरे लिये, मुझे लेने खुद आया है सागर, वरिष्ठ शायर हरबंस पथिक ने कहा जख्मों के निशां लिये फिरते हैं,दिल के टूटे अरमां लिये फिरते हैं,शायरा डॉ वनीता चौपड़ा ने कहा आज वनीता श्याम से पूछो, क्यों आखिर बरसाना छोड़ा, कवयित्री शशी बाला शर्मा ने कहा एक मां बाप को बेटे का रिश्ता आया है,घर में असीम आनन्द छाया है, कवयित्री रोजलीन ने कहा सच ना कहना झूठो की शान में दख़ल न देना, मुंह ना खोलों जज्बातों में आकर, कहीं गिरे न तुम पर आकर, युवा शायर अशोक मलंग ने कहा रौनक चली गई है, महफ़िल भले वहीं है, पानी के बुलबुले सा देखो ये आदमी है, कवयित्री गुरविंदर कौर गुरी ने कहा वर्षों का अनुभव जिसकी अमूल्य पहचान, सेवा समर्पण, स्नेह से पाया सबका सम्मान, कवि दीपक वोहरा ने कहा फूल झर चुका है डाल से, पर हवा में तैर रही है,अब भी उसकी सुगंध, कवयित्री मंजूषा दुग्गल ने कहा जो दर्द ओढ़ कर दुनिया को मुस्कुराना सिखा गया,वो शख्स आज भी हर भीगी आंख में जिंदा है। कवयित्री डॉ हर्ष सेठी ने कहा शब्दों का वो साधक आज भी अमर है, उनकी हर रचना में जीवन का स्वर है, राजपाल रोजडा व रमेश कुमार ने अपनी प्रस्तुति में डॉ एस के शर्मा को याद किया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि को शाल व स्मृति चिन्ह, अध्यक्ष,विशिष्ट अतिथि व विशेष अतिथियों को शाल भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में दो मिनट का मौन रख डॉ एस के शर्मा को श्रद्धांजलि दी गई। इस कार्यक्रम में डॉ एस के शर्मा की सुपुत्री भावना कौशिक, प्रेरणा शर्मा, पुत्र राजेश कौशिक सहित वीरेंद्र कुमार,गोपाल दास, शीला रानी, रमेश कपूर, परिणीता कपूर, रामप्रकाश शर्मा, ईश्वर सिंह,देव,आरती व श्रोतागण उपस्थित रहे।
