जेएल न्यूज / JL NEWS
भोपाल ( मध्य प्रदेश ) / 06-10-2026
(रिपोर्ट – मुकेश सिंह)
आयुष्मान भारत योजना में कथित फर्जीवाड़े के मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने सृष्टि हॉस्पिटल के संचालक राजकुमार सूर्यवंशी एवं अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया है। जांच में अस्पताल द्वारा आयुष्मान योजना के ऑनलाइन पोर्टल पर डॉक्टरों और स्टाफ की ऐसी जानकारी दर्ज किए जाने की बात सामने आई है, जो जांच के दौरान संदिग्ध पाई गई। EOW की जांच के अनुसार, आयुष्मान भारत योजना से जुड़ने और योजना में बने रहने के लिए अस्पताल को अपने यहां कार्यरत डॉक्टरों और कर्मचारियों की जानकारी पोर्टल पर दर्ज करनी होती है। इसमें डॉक्टर का नाम, रजिस्ट्रेशन नंबर और अस्पताल में वास्तव में कार्यरत होने की जानकारी देना जरूरी है। इसी आधार पर अस्पताल को योजना में सूचीबद्ध किया जाता है और पात्र मरीजों के इलाज का भुगतान शासन की ओर से किया जाता है।
*45 डॉक्टरों की एंट्री, अलग-अलग नाम सिर्फ 15*
आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ को सृष्टि हॉस्पिटल के खिलाफ मिली शिकायत की जांच के दौरान पता चला कि अस्पताल ने आयुष्मान योजना के ऑनलाइन पोर्टल पर स्टाफ की 45 एंट्री दर्ज की थीं। हालांकि जांच में इन एंट्री में अलग-अलग नामों की संख्या लगभग 15 ही पाई गई।जांच में आरोप है कि कई डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के नाम को चार-चार बार तक दोहराया गया। इतना ही नहीं, सभी 45 एंट्री के आगे एक ही मोबाइल नंबर दर्ज किया गया था। जांच एजेंसी के अनुसार यह मोबाइल नंबर अस्पताल संचालक का बताया गया है। इस तरह अस्पताल के रिकॉर्ड में बड़ी संख्या में डॉक्टर और स्टाफ उपलब्ध होने का दावा किया गया, जबकि जांच में दर्ज नामों और वास्तविक स्थिति में अंतर पाया गया।
*जिस पैथोलॉजिस्ट का नाम दर्ज था, वह अस्पताल में काम ही नहीं करती थीं*
जांच के दौरान एक महिला पैथोलॉजिस्ट का नाम भी अस्पताल की सूची में चार बार दर्ज पाया गया। पूछताछ में संबंधित पैथोलॉजिस्ट ने बताया कि उन्होंने सृष्टि हॉस्पिटल में कभी काम नहीं किया। महिला डॉक्टर के अनुसार उन्होंने अस्पताल को न तो कोई दस्तावेज उपलब्ध कराया था और न ही अपने नाम के इस्तेमाल की अनुमति दी थी। जांच के दौरान जब उनका नाम सूची से हटाने की बात कही गई, तब भी वह नाम रिकॉर्ड में बना रहा।
*फर्जी हस्ताक्षर से जारी की गईं पैथोलॉजी रिपोर्ट*
EOW की जांच में एक और गंभीर मामला सामने आया। अस्पताल ने ‘डिपार्टमेंट ऑफ पैथोलॉजी’ के नाम से कुछ जांच रिपोर्ट जारी की थीं। इन रिपोर्टों पर एक MD पैथोलॉजिस्ट का नाम, रजिस्ट्रेशन नंबर और सील लगी हुई थी। संबंधित डॉक्टर ने जांच के दौरान स्पष्ट किया कि रिपोर्ट पर किए गए हस्ताक्षर उनके नहीं हैं और वे उनके वास्तविक हस्ताक्षर से पूरी तरह अलग हैं।
*आयुष्मान मरीजों के इलाज में इन रिपोर्टों का इस्तेमाल*
योजना के रिकॉर्ड के मुताबिक, वर्ष 2025 में सृष्टि हॉस्पिटल में 709 हितग्राहियों का इलाज दर्ज किया गया है। जांच एजेंसी अब यह भी जांच कर रही है कि इन मरीजों के इलाज के एवज में आयुष्मान योजना से अस्पताल को कितनी राशि का भुगतान किया गया और उस भुगतान में कथित फर्जी दस्तावेजों की क्या भूमिका रही।
*डॉक्टरों के नियुक्ति दस्तावेज भी नहीं मिले*
जांच के दौरान EOW ने अस्पताल प्रबंधन से सूची में दर्ज डॉक्टरों के नियुक्ति पत्र, वेतन रिकॉर्ड और उपस्थिति संबंधी दस्तावेज मांगे। साथ ही पैथोलॉजी संचालन की अनुमति और मरीजों की इलाज संबंधी फाइलें भी मांगी गईं।
जांच एजेंसी के अनुसार अस्पताल प्रबंधन कई बार मांग किए जाने के बावजूद सूची में दर्ज डॉक्टरों से संबंधित पर्याप्त दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा सका। पैथोलॉजी की अनुमति और मरीजों के इलाज से संबंधित कुछ रिकॉर्ड भी जांच में प्रस्तुत नहीं किए जा सके।
*इन धाराओं में दर्ज हुआ मामला*
जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर EOW ने 5 अक्टूबर 2026 को सृष्टि हॉस्पिटल के संचालक राजकुमार सूर्यवंशी एवं अन्य के खिलाफ अपराध क्रमांक 0104 भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 318(4), 336(3), 340(2) और 61(2) के तहत अपराध दर्ज किया है। EOW अब आयुष्मान योजना के माध्यम से अस्पताल को किए गए भुगतान, उसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका और कथित फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल की जांच कर रही है।
